
Monday, July 26, 2021
Wednesday, February 3, 2021
स्वामी रामानंदाचार्यः (Swami Ramanand) भारत में धार्मिक नवजागरण और समरसता के प्रतीक
स्वामी रामानंद की 723 वीं जयंती (4 फरवरी, 2021) पर विशेष
कबीरदास (Kabir das) के बारे में प्रसिद्ध है कि स्वामी रामानंद का आशीर्वाद पाने के लिए उनको काशी के पंचगंगा घाट की सीढ़ियों पर अहले सुबह लेटना पड़ा था, जिस रास्ते स्वामी रामानंद नित्य सुबह गंगास्नान के लिए जाया करते थे. कहते हैं कि अचानक स्वामी रामानंद का पैर कबीर पर पड़ा और वो अफसोस में राम-राम बच्चा बोल पढ़े. कबीर ने रामानंद से अपने को शिष्य बनाने का आग्रह किया और रामानंद ने जुलाहे घर पले-बढ़े कबीर को ह्रदय से लगा लिया. राम नाम ही उनका गुरुमंत्र हो गया.
Tuesday, February 2, 2021
आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्राविड को 2021 का जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार- स्वामी रामनरेशाचार्य
रामानंदाचार्य की 723 वीं जयंती का अनुष्ठान काशी और
प्रयागराज में
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देव
कुमार पुखराज
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के शीर्ष संत स्वामी रामानंद की स्मृति में दिया जाने वाला एक लाख रुपये का जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार इस बार काशी के प्रसिद्ध विद्वान आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ को दिया जाएगा. स्वामी रामानंदाचार्य जी के प्राकट्य धाम (जन्मस्थली) प्रयागराज के दारागंज में 5 फरवरी को पुरस्कार वितरण समारोह होगा. पुरस्कार स्वरुप एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र, शॉल और श्रीफल देकर द्राविड जी का सम्मान किया जाएगा. रामानंद संप्रदाय के प्रधान आचार्य जगदगुरु रामानंदाचार्य पद प्रतिष्ठित स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज ने यह जानकारी दी.
संस्कृत और संस्कृति के लिए सम्मान-
काशी के
पंचगंगा घाट स्थित श्रीमठ के पीठाधीश्वर और रामानंदी वैष्णवों के प्रधान आचार्य जगदगुरु
स्वामी रामनरेशाचार्य के अनुसार हर वर्ष स्वामी रामानंदाच्रार्य जी की जयंती
प्रसंग पर किसी विशिष्ट विद्वान को एक लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाता है.
संस्कृत और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए काशी से दिया जाने वाला
यह सबसे बड़ा पुरस्कार है. उन्होंने बताया कि 1993 से लगातार यह पुरस्कार वितरित
हो रहा है. इस वर्ष का पुरस्कार काशी ही नहीं अपितु राष्ट्र की वैदिक सनातन धर्म
की विद्या, संयम, त्याग, निष्ठा और सदाचार की अप्रतिमविमूर्ति आचार्य गणेशश्वर
शास्त्री द्राविड को प्रदान किया जाएगा.
कौन हैं आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्राविड-
काशी के रामनगर में 9 दिसम्बर, 1958 को जन्में गणेश्वर
शास्त्री द्राविड रामघाट स्थित सांग्वेद विद्यालय के संचालक हैं. इनके पिता
राजराजेश्वर शास्त्री द्राविड को पण्डितराज कहा जाता था और भारत सरकार ने उन्हें
पदमभूषण से सम्मानित किया था. गणेश्वर शास्त्री को वेद, कृष्णयजुर्वेद, तैत्तिरीय
शाखा, शुक्लयजुर्वेद-शतपथ ब्राह्मण, वेदांग, न्यायादिदर्शन, पुराण, इतिहास,
राज-शास्त्र, धर्म-शास्त्र काव्य-कोष, ज्योतिष, तंत्रागम एवं श्रौत का आधिकारिक
विद्वान माना जाता है. हाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की लिए
मुहुर्त निकालने का श्रेय भी गणेश्वर शास्त्री द्राविड के खाते में है. स्वामी
रामनरेशाचार्य कहते हैं- “गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ का सम्मान भारत की सनातन वैदिक
परंपरा का सम्मान है. उन्होंने वेदों के अध्ययन-अध्यापन और यज्ञों के संपादन में
ही अपना पूरा जीवन लगा दिया. निजी घर-गृहस्थी नहीं बसाई. नंगे पांव रहकर यम-नियम
का संपादन करते हुए ऋर्षि तुल्य जीवन जीते रहे. वस्त्र के नाम पर केवल एक धोती
पहनते हैं.”
रामानंदाचार्य पुरस्कार का इतिहास-
श्रीमठ की ओर से दिया जाने वाला जगदगुरु रामानंदाचार्य
पुरस्कार सबसे पहले प्रोफेसर भगवती प्रसाद सिंह को पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल
सिंह के कर कमलों से प्रदान किया गया. तब इसकी राशि दस हजार रुपये थी, जिसे बढ़ाकर
एक लाख रुपया कर दिया गया. 1993 में महामंडलेश्वर काशिकानंद महाराज को काशीराज
महाराजा विभूतिनारायण सिंह की अध्यक्षता में पहला पुरस्कार प्रदान किया गया. फिर
काशीनरेश श्रीविभूतिनारायण सिंह के हाथों ही पण्डितराज
राजराजेश्वर शास्त्री द्राविड को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह
महज संयोग नहीं है कि उनके ही पुत्र आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्राविड को 2021 में
यह पुरस्कार दिया जा रहा है. अबतक डॉ. कर्ण सिंह, आचार्य डॉ. रामकरण शर्मा, डॉ.
विवेकी राय, डॉ. कमलेश दत्त त्रिपाठी, श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा उर्फ मनु शर्मा,
प्रो. कृष्णदत्त पालीवाल, आचार्य रामयत्न शुक्ल, प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी, डॉ. उदय
प्रताप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय, प्रो. रमाकांत आंगिरस, प्रो.
युगेश्वर, डॉ. कृष्णकांत चतुर्वेदी आदि को यह पुरस्कार मिल चुका है.
रामानंदाचार्य जयंती 4-5 फरवरी को
जगदगुरु
स्वामी श्रीरामनरेशाचार्यजी ने बताया कि रामावतार श्रीसंप्रदायाचार्य
रामानंदाचार्य जी का 723 वां जयंती महोत्सव इस बार भी उनके मूलपीठ श्रीमठ की ओर से
दो दिवसीय अनुष्ठान के तौर पर 4 और 5 फरवरी को समायोजित है. इस बार यह आयोजन उनकी
साधना पीठ श्रीमठ, पंचगंगा घाट, काशी के अलावे उनके प्राकट्य धाम, दारागंज,
प्रयागराज में भी धूमधाम से किया जा रहा है. पहले दिन यानि चार फरवरी को श्रीमठ
में सुबह 9 से 11 बजे तक स्वामी रामानंद जी का पूर्ण वैदिक गरिमा एवं समृद्धि से
पूजन होगा. 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक संतों, महंतों एवम भक्त विद्वानों के द्वारा
आचार्य गुणगान होगा. दोपहर से शाम तक संत, महंत, भक्त और अभ्यागतों का वैष्णवाराधन
यानि भंडारा चलेगा.
स्वामी रामानंद की जन्मभूमि पर समारोह-
दूसरे दिन यानि 5 फरवरी को प्रयागराज के मोरी दारागंज स्थित जगदगुरु रामानंदाचार्य प्राकट्यधाम में दिनभर उत्सव होंगे. सुबह 10 बजे से 12 बजे तक जगदम्बा सुशीला देवी की गोद में विराजमान आचार्यश्री का पूजन होगा. दोपहर में समष्टि भंडारे का कार्यक्रम है. शाम 3 बजे से 6 बजे तक आचार्यश्री पर केन्द्रित विद्वत संगोष्ठी होगी और उसी शाम 6 बजे से जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार समर्पण का कार्यक्रम होगा
Saturday, July 4, 2020
जगदगुरु स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज का चातुर्मास व्रत-2020 गुरुपूर्णिमा से जबलपुर में
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| Swami Ramnareshacharya |
काशी के श्रीमठ पीठाधीश्वर प्रत्येक वर्ष नियम पूर्वक चातुर्मास व्रत का अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से देश के अलग-अलग स्थानों पर करते रहे हैं। सभी प्रमुख तीर्थों और महानगरों में स्वामी रामनरेशाचार्यजी महाराज के चातुर्मास अनुष्ठान समायोजित हो चुके हैं। पिछले साल माउंट आबू स्थित ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर प्रांगण में चातुर्मास व्रत का आयोजन हुआ था। इस वर्ष महाराजश्री जबलपुर में चातुर्मास के लिए संकल्पित हुए हैं। जबलपुर में मां नर्मादा के किनारे जिलेहरी घाट पर अवस्थित प्रेमानंद आश्रम को अनुष्ठान भूमि के रुप में चयनित किया गया है।
प्रेमानंद आश्रम में पावन चातुर्मास महापर्व का भव्य प्रारंभ 5 जुलाई गुरु पूर्णिमा से होगा। सियारामजी की कृपा छाया और स्वामी श्रीरामनरेशाचार्यजी महाराज के पावन सान्निध्य में चातुर्मास महापर्व के दौरान प्रत्येक दिन अनेक प्रकार के मांगलिक अनुष्ठान होेंगे। प्रातः काल महाराजश्री पोषडोपचार विधि से श्रीसीताराम जी का पूजन करते हैं। फिर देव-ऋर्षि पितृतर्पण का कार्य संपादित करते हैं। समष्टि हवन और फिर स्वाध्याय का क्रम नियमित रुप से चलता है। दोपहर में वैष्णवाराधन और विश्राम के पश्चात संध्या काल के कार्यक्रम होते हैं। जिसमें आगंतुक संत-महंत अपने प्रवचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हैं। फिर महाराजश्री का आशीर्वचन स्वरुप प्रवचन होता है। चातुर्मास काल में सावन की प्रत्येक सोमवारी को भगवान शिव का रुद्राभिषेक के अलावे गोस्वामी तुलसीदास की जयंती, संत सम्मेलन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, नंद महोत्सव, विनायक चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी जैसे पर्व और महोत्सव धूमधाम से मनाये जाते हैं। इसके अलावे राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी, राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और विराट भंडारे का आयोजन में बीच-बीच में होते रहता है। पूरे दो महीने तक अखंड श्रीरामनाम संकीर्तन से भी पूरा वातावरण भक्तिमय रहता है।
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| Swami Ramnareshacharya chaturmas |
जबलपुर के प्रेमानंद आश्रम के श्रीमहंत श्यामदास जी महाराज उर्फ नागा बाबा ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा 5 जुलाई से लेकर भाद्र पूर्णिमा 02 सितम्बर, 2020 तक चलने वाले चातुर्मास अनुष्ठान के दौरान देश भर से भक्त,सद् गृहस्थ, संत- महंत और महामंडलेश्वर पधारेंगे। कोरोना संकट को देखते हुए सरकार की हर गाइडलाइंस खासकर साफ-सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष प्रबंध रखा जाएगा। आश्रम की विशालता, भव्यता, समुचित संसाधन और आवास की पर्याप्त सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए ही इस स्थान का चयन चातुर्मास महोत्सव के लिए किया गया है। आश्रम की प्राकृतिक छटा और संपूर्ण वातावरण कोरोना को दूर रखने में सहायक होगा, ऐसा व्यवस्थापकों का मानना है।
महाराजश्री स्वयं भी इस बात के लिए प्रयत्नशील हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों खासकर भंडारे और प्रवचनों के दौरान अनावश्यक भीडभाड़ न हो। उनकी ओर से विशाल परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग सहित कोरोना काल की जरुरी पाबंदियों का पालन अनिवार्य रुप से करने का निर्देश संतों- भक्तों को दिया गया है। ताकि चातुर्मास महापर्व का आध्यात्मिक स्वरूप हर स्थिति में बना रहे और किसी को किसी प्रकार का कष्ट न हो।
जबलपुर में महाराजश्री तीसरी बार चातुर्मास कर रहे हैं। सन 1990 और 2001 में भी आचार्यश्री यहां चातुर्मास व्रत किये थे। यह तीसरा आयोजन है, जो सन 2020 में हो रहा है।
Friday, October 19, 2018
पूज्यपाद स्वामी श्रीरामनरेशाचार्यजी महाराज के प्रवचनांश, प्रसंग- विजयादशमी
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| Swami Ramnareshacharya |
प्रतिशोध के लिए और श्रेष्ठ मूल्यों की स्थापना के लिए उन कृत्यों की जरूरत नहीं है, जिन कृत्यों की हम निंदा करते हैं। जोर-ज्यादती ठीक नहीं है। रावण जैसी तानाशाही ठीक नहीं है। जब देश स्वतंत्र हुआ, तब किसी ने गांधी जी से कहा कि देश में तानाशाही की जरूरत है। गांधी जी ने जवाब दिया, ‘यह मैं भी मानता हूं, लेकिन जो लोग दस साल तानाशाही चला लेंगे, वो फिर लोकतंत्र को नहीं आने देंगे।’ प्रतिशोध भाव होना चाहिए, लेकिन सुधार के लिए होना चाहिए। हमें यथोचित मर्यादाओं, संविधान, धर्म के हिसाब से चलना चाहिए। हमें कदापि बर्बर नहीं होना चाहिए।
Sunday, July 15, 2018
जगदगुरु स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज का चातुर्मास महोत्सव इस साल तीर्थराज प्रयाग में
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| स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज |
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| रामानंदाचार्य चातुर्मास कार्ड |
Sunday, January 7, 2018
प्रोफेसर सियाराम तिवारी को वर्ष 2018 का जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार
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| प्रो. सियाराम तिवारी को एक लाख रु. का पुरस्कार प्रदान करते पूर्व विधायक अजय राय |
प्रो.तिवारी ने समारोह के साथ नियोजित "विश्वगुरूत्व और रामभक्ति परंपरा '' विषयक विद्वत संगोष्ठी के परिप्रेक्ष्य में विद्वतजनों के विचारों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि रामानंद जी की रामभक्ति परंपरा को आगे की पीढ़ी में उत्कर्ष प्रदान करने वाले गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान राम के अनुकरणीय उदात्त चरित्र को लोकमानस में सहज स्वरूप में स्थापित कर समाज को प्रेम और मर्यादा भाव से जोड़ने का अतुलनीय योगदान दिया। तुलसी दास की कुछ आधुनिक विद्वान समूहों द्वारा आलोचनाओं का प्रामाणिक उत्तर भी प्रो.तिवारी द्वारा रचित एवं रामानंदाचार्य स्मारक न्यास द्वारा प्रकाशित ग्रंथ "सत्य कहौं लिखि कागर कोरे" ग्रंथ के माध्यम से मिला, जिसका लोकार्पण भी समारोह के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो.परशुराम पाल ने किया।
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| ग्रंथ लोकार्पण करते प्रो.परशुराम पाल |
समारोह में ज.गु.रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य ने कहा कि रामानंदाचार्य पुरस्कार साहित्य व संस्कृति सेवा में विशिष्ट योगदान के समादर की परंपरा है। सम्मान के भाव का विशिष्ट महत्व सभी संस्कृतियों और सभ्यता को उत्कर्ष प्रदान करने में रहा है।
उक्त अवसर पर श्रीमठ द्वारा उपस्थित विद्वानों का भी सम्मान किया गया। संगोष्ठी में विचार व्यक्त करने वाले विद्वत जनों में सर्वश्री प्रो.एम. एन.राय , प्रो.प्रभुनाथ द्विवेदी, डा.जितेंद्र नाथ मिश्र, डा.देवव्रत चौबे, प्रो.राधेश्याम दूबे व प्रो.सभापति मिश्र आदि प्रमुख रहे।
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| मंच पर विराजते जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य जी महाराज |
रामानंदाचार्य पुरस्कार से सम्मानित प्रो.तिवारी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सविधि प्रक्रिया से सम्मान एवं अभिनंदन की विभिन्न प्रवृत्तियों को संपादित करने वालों में शामिल थे श्री अजय राय, पूर्व विधायक,अरुण शर्मा,डा. उदय प्रताप सिंह,अमूल्य शर्मा, सत्येन्द्र पाण्डेय, महेन्द्र, ए.के.राय- एडवोकेट, पं.वल्लभ पाठक, प्रो.सतीश राय आदि के अलावा राजस्थान एवं बिहार रामानंद युवा आध्यात्मिक मंडल के सदस्यगण।मंच संचालन चंदन कुमारी ने किया। श्रीमठ के युवा वैदिकजन ने मंगलाचरण की प्रस्तुति की। आरंभ में आद्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
Monday, September 12, 2016
प्रभु को अर्पित करने के बाद ग्रहण करें भोजन - जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य
सात्विक पदार्थो को सात्विक मन से परम प्रभु के लिए ही पकाया जाना और उन्हें ही सबसे पहले श्रेष्ठ प्रेम एवं संयतमना होकर समर्पित किया जाना, तत्पश्चात् उनका प्रसाद उनके ही रूप में ग्रहण करना एक आराधना ही है। यह आराधना महाराधना हो जाती है जब भोग हो प्रभुका छप्पन भोग और प्रसादग्राही हो ऊंच-नीच, जाति-भेद, वर्ण-भेद आदि से रहित सर्वजन। यह विचार जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य ने राजधानी में चल रहे दिव्य चातुर्मास्य के दौरान रखे।
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| पटना में समष्टि भंडारे का चित्र |
दिव्य चातुर्मास्य महोत्सव महायज्ञ के दौरान रविवार को बैंक रोड के मुहाने पर मंगलमय छप्पन भोग का भंडारा का आयोजन किया गया। स्वामी जी ने इस अवसर पर कहा कि जितनी भी अच्छी-से अच्छी वस्तुएं होती हैं, उसे हम सम्यक मन से प्रभु को समर्पित करते हैं। सब उन्हीं का तो है। ’त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।’ यह केवल वाच्यात्मक नहीं भावनात्मक भी होनी चाहिये। तब प्रभु अपना सायुज्य देते हैं, यहां तक कि भोग में अपनी साम्यता भी दे देते हैं।
प्रभु ऐसे समतावादी हैं कि जो भोग वे स्वयं लेते हैं अपने भक्तों को भी प्रदान कर देते हैं। तात्पर्य यह हुआ कि सम्यक रूप से भावभावित प्रेमरस संपृक्त अर्पण प्रभु का सायुज्य देते हुए भोग की साम्यता भी करवा डालती है। छप्पन भोगात्मक समष्टि भण्डारा का (वैष्णवाराधन) के समायोजन में सेवा-व्रति लोग मोह-ग्रस्त हो रहे थे, परन्तु जब आचार्यश्री ने यह समझाया कि यह तो प्रभु-कार्य है, इसमें आप तो केवल निमित्तमात्र हैं। गीता में कहा है- निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन। यह एक विराट महायज्ञ है, आप इसमें निमित्त बनें, शेष तो प्रभु स्वयं संभाल लेंगे। अजरुन का मोह नष्ट हुआ और कार्य में प्रवृत्त होने पर प्रभु-साक्षात्कार भी हुआ।
Thursday, September 8, 2016
शरणागतिके सभी अधिकारी हैं- स्वामी रामनरेशाचार्य
इसी प्रकारसे वैदिकशास्त्रोंने भी तत्-तत् फलदायक कर्मोंके सम्पादनके लिये अधिकारीका निर्धारण किया है। मोक्षदायक ज्ञानकी प्राप्तिके लिये वे ही अधिकारी हैं जो साधन-चतुष्टय सम्पन्न हैं; अर्थात् जिनके पास नित्य तथा अनित्यका विवेक हो, इस लोक एवं परलोकके समस्त भोगसाधनोंसे पूर्णतः विरक्ति हो, शम-दमादि छः सम्पत्तियाँ हों तथा दृढ़मुमुक्षुत्व (प्रबलतम मोक्षप्राप्तिकी इच्छा) हो। इतना ही नहीं, उपर्युक्त विशिष्ट साधनोंसे सम्पन्न साधकको ब्राह्मण होना आवश्यक है, वह भी पुरुष जाति का। क्योंकि ब्रह्मविद्याके अनुष्ठानमें उपनयन-संस्कारसे मण्डित वेदाध्ययनके लिये अधिकृत मात्र ब्राह्मण ही है। वही संन्यासी बनकर ज्ञान-साधनाके अनुसार ज्ञानको प्राप्तकर मोक्षको प्राप्तकर सकता है। इस साधनामें क्षत्रियादि तथा स्त्रियोंकी अधिकारिता सर्वथा अवरुद्ध है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ आचार्योंने भक्तिको भी ब्रह्म-विद्या स्वरूप स्वीकारकर उसके प्रवेश-द्वारको क्षत्रियादि एवं स्त्रियोंके लिये बन्ध कर दिया है। केवल ब्राह्मण ही भक्ति-साधनाका अधिकारी है। इस सम्बन्धमें अन्यान्य महामनीषि आचार्य सहमत नहीं हैं। उनकी परमोदार घोषणा है कि भक्ति- साधनाके सभी अधिकारी हैं। उसका सम्पादन कर सभी मानव जीवनको परम धन्यतासे मण्डित कर सकते हैं।
परन्तु शरणागतिकी उदारता तो आकाशके समान है। धन्य है वैदिक सनातन धर्म, धन्य हैं राम-कृष्णादि भगवदवतार तथा धन्य हैं वे आचार्य व सन्तगण जिन्होंने शरणागतिको प्रचारित एवं प्रसारितकर असंख्य जीवोंको परमफलसे विभूषित किया।
इन विचारोंको जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी श्री रामनरेशाचार्यजी महाराजने अभिव्यक्त किया कल्याणकामियोंके लिये; जो अपने पटना-प्रवास के क्रममें लगातार लाला लाजपत राय सभागारमें विचारामृतकी वर्षा कर रहे हैं।
Thursday, July 30, 2015
जोधपुर में दिव्य चातुर्मास महोत्सव शुरू
| SWAMI RAMNARESHACHARYA |
उल्लेखनीय है कि महाराजश्री ने वर्ष १९९४ में भी जोधपुर में चातुर्मास व्रत किया था। पूरे २० साल बाद जोधपुर में फिर से चातुर्मास समायोजित हुआ है। एक खास बात यह है कि पिछले चातुर्मास में भी आयोजन समिति के अध्यक्ष सेनाचार्य स्वामी अचलानन्द जी गिरि थे और इस बार भी उन्हीं की अध्यक्षता में कार्यक्रम शुरू हुआ है।
| स्वामी रामनरेशाचार्य |
Friday, October 31, 2014
स्वामी रामनरेशाचार्यजी महाराज का जनकपुर प्रवास, तैयारियां शुरू
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| Janaki Temple, Janakpur, Nepal |
प्रत्येक वर्ष की भांति प्रभु श्रीराम की बारात भी अयोध्या, काशी और बक्सर जैसे स्थानों से निकलेगी और
जिस रास्ते प्रभु राम जनकपुर गये थे, उसी रास्ते का अनुगमन करते हुए जनकपुर तक जाएगी। रामभक्ति परंपरा के मूल आचार्यपीठ के वर्तमान आचार्य श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज के जगदगुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठित होने के 25 साल हो रहे हैं। इसलिए भी इस साल का महत्व काशी स्थित श्रीमठ के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व का है।
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| Maa Janki Temple |
बिहार के विभिन्न स्थानों पर यात्रा में शामिल लोगों के स्वागत औऱ अभिनंदन की पुरजोर तैयारी चल रही है। रामानंदाचार्य आध्यात्मिक मंडल से जुड़े लोग देशभर से आए रहे संत-महात्मा और भक्तों के स्वागत-सत्कार की तैयारियों में जी जान से लगे हैं। यात्रा का दौरान बाहर से आ रहे अतिथियों के कोई परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
श्रीमठ, काशी से जुड़े आरा निवासी सत्येन्द्र पाण्डेय ने बताया कि श्रीराम विवाह यात्रा का पहला पड़ाव आरा में पड़ रहा है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी कुछ ज्यादा बढ़ गयी है। आरा में अतिथियों को सुरुचिपूर्ण बिहारी व्यंजन परोसा जाएगा। यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए हर तरह के प्रबंध किये जा रहे हैं। प्रचार-प्रसार के लिए पर्चा, पोस्टर और होर्डिंग्स बनवाये जा रहे हैं।
Sunday, June 9, 2013
बिहार के आठ दिवसीय प्रवास पर आरा पहुंचे स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य
आरा प्रवास के दौरान महाराजश्री आज यानि 9 जून 2013 को भोजपुर जिले के शाहपुर और बिहियां के कई गांवों का दौरा किया। सबसे पहले वे गंगा तट पर बसे बहोरनपुर गांव में गये और भक्तों को आशीर्वाद दिया। फिर गौरा और बारा आदि गांवों में भी महाराजश्री के प्रवचन हुए। अगले दो दिनों तक स्वामी जी बक्सर जिले के कई गांवों में प्रवास करेंगे। दरअसल बक्सर में आगामी दिसम्बर माह में श्रीमठ की ओर से प्रस्तावित कोटि होमात्मक श्रीराम महायज्ञ की तैयारियां भी शुरू हो गयी हैं। महाराज श्री अपने प्रवास के क्रम में श्रीराम महायज्ञ को लेकर भी भक्तों को निमंत्रित कर रहे हैं।
Friday, February 22, 2013
जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार वितरित
जगदगुरु रामानंदाचार्य पद प्रतिष्ठित स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य जी महाराज का जन्मदिन भी वसंत पंचमी के दिन ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। भक्तों के विशेष आग्रह पर स्वामीजी जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित विविध कार्यक्रमों में शामिल होने को तैयार हुए। इस निमित्त विशेष पूजा,आरती और गीत-संगीत का भी आयोजन किया गया । सुरूचिपूर्ण भंडारे के साथ भक्तजनों ने अपने पूज्य गुरुवर के जन्मदिन को यादगार बनाया।

















