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Saturday, July 13, 2013

जगदगुरु स्वामी श्रीरामनरेशाचार्यजी महाराज ने किया हनुमान मंदिर का उदघाटन

भोजपुर जिले के सिकरहटा थाना के नोनाडीह मोड़ पर बने हनुमानजी के भव्य मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा आज दिनांक 14 जुलाई दिन रविवार को पूर्ण विदि-विधान और वैदिक रीति से संपन्न हुआ। वैरागी वैष्णव संप्रदाय (रामावत या श्रीसंप्रदाय) के प्रधान आचार्य और श्रीमठ,काशी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्यजी महाराज के कर कमलों द्वारा मंदिर के श्रीविग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस मौके पर दक्षिणी भोजपुर के पचासो गांवों से आए श्रद्धालु हजारों की संख्या में मौजूद थे।
स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म के देवताओं में हनुमान जी का स्थान अद्वितीय है। उन्हें प्रजा पालक प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त होने के चलते भक्त शिरोमणि का दर्जा हासिल हैं। वे भगवान के वरदान स्वरुप आज भी धरा धाम पर विराज रहे हैं और अपने भक्तों से निर्भयता का वरदान देते हैं।
चार दिनों तक चले प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान रामभक्ति परंपरा से जुड़े बड़ी संख्या में संतो-महंतों के दर्शन एवम पूजन का लाभ स्थानीय श्रद्धालुओं का प्राप्त हुआ। ये पहला मौका था जब दो दशक तक उग्रवाद और हिंसा से संतप्त रहे दक्षिण भोजपुर के इस अति पिछड़े  इलाके में जगदगुरु जैसे धर्माचार्य  का पदार्पण हुआ था।
प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को गरिमा प्रदान करने में रामानंदाचार्य आध्यात्मिक मंडल के सदस्यों ने भी पूरी ताकत लगा दी थी। महाराजश्री को विदा देने के भक्त श्रद्धालुओं की आँखे नम हो गयी थी।
 महाराजश्री सुबह 10 बजे सड़क मार्ग से पटना के लिए रवाना हो गये। आज ही उन्हें वायुमार्ग से पटना से भाया दिल्ली सूरत पहुंचना है, जहां अगले कुछ दिनों तक वे विविध धार्मिक आयोजनों में शामिल होंगे।
 

Sunday, January 15, 2012

रामानंदाचार्य पुरस्कार वितरण समारोह के चित्र





डॉ.विवेकी राय को जगदगुरु रामानंदाचार्य पुरस्कार

वाराणसी। जगदगुरु रामानंदाचार्य जयंती के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय समारोह का श्रीगणेश शनिवार को धर्माचार्यों के सानिध्य में हुआ। प्रथम दिन पियरी स्थित श्रीमठ की शाखा श्रीविहारम परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में हिंदी और भोजपुरी की स्वनामधन्य साहित्यकार डा. विवेकी राय को रामानंदाचार्य सम्मान से विभूषित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई।

जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य एवं गोपाल मंदिर के षष्ठपीठाधीश्वर श्याम मनोहर महाराज के सानिध्य में साहित्यसेवी डा. विवेकी राय को सम्मानित किया गया। स्वामी रामनरेशाचार्य ने उनका तिलक कर एक लाख की राशि का चेक प्रदान किया तो श्याममनोहर महाराज ने उन्हें प्रशस्तिपत्र प्रदान किया।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर कार्य करने वाले नगर के 22 साहित्यसेवियों का भी समारोह में अभिनंदन किया गया। इनमें प्रो. बलराम पांडेय, डा. राममूर्ति चतुर्वेदी, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. सुधाकर मिश्र, डा. जितेंद्रनाथ मिश्र, डा. रणजीत सिंह, डा. जगदीश त्रिपाठी, डा. जगदीश प्रसाद मिश्र, परमानंद आनंद, प्रो. अरविंद पांडेय, प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी, डा. पवनकुमार शास्त्री, डा. बलबीर सिंह, डा. समुन जैन, डा. ऋचा सिंह, बृजेश पांडेय के अलावा इटैलियन युवती दानिएला बेवीलाकुवा शामिल हैं। समारोह में संतद्वय के आशीर्वचन से पूर्व प्रो. युगेश्वर, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. बंशीधर त्रिपाठी ने विचार व्यक्त किए।समारोह का संचालन डा. यूपी सिंह ने किया।


साहित्यकार होने का अहंकार है मुझे
वाराणसी। मैं गरीब साहित्यकार हूं। मेरे पास कार नहीं है लेकिन साहित्यकार होने का अहंकार जरूर है। किंतु आज इस सभा में उस अहंकार को भी गाजीपुर में ही छोड़ कर आया हूं। यह बातें सम्मान से अभिभूत डा. विवेकी राय ने शनिवार को श्रीविहारम में आयोजित समारोह में कहीं। उन्होंने पुराने संस्मरण भी सुनाए। बताया, मुझे याद आता है दिल्ली का वह समारोह जब श्रीरामनरेशाचार्य महाराज के सानिध्य मेें समारोह हो रहा था। उनके आदेश पर पहले मुझे रामनामी ओढ़ाई गई। कुछ देर बाद ही रामनामी की जगह एक कीमती शाल ओढ़ा दी गई। मुझे लगा, शायद अभी मैं वैराग्य के योग्य नहीं हुआ हूं। पूरी तरह संसारी हूं इसलिए रामनामी लेकर शाल दी गई है। अब आप फिर मुझे माया सौंप रहे हैं। कम से कम अब तो मुझे राम नाम का महामंत्र दे ही दीजिए।